पीसीओडी/पीसीओएस (PCOD/PCOS) महिलाओं में पाई जाने वाली एक आम समस्या, जो कि हार्मोन्स में आए बदलाव के कारण होती है। पहले ये समस्या महिलाओं में 30 की उम्र के बाद में देखने को मिलती थी लेकिन आजकल ये बीमारी बहुत कम उम्र की लडकियों में देखी जा रही है। लेकिन डरिए नहीं, सही इलाज और देखभाल से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आइये पहले तो PCOD के बारे में जानते हैं:

सेक्स हार्मोन (Androgen Hormone) के असंतुलन या यूं कहें कि जरूरत से ज्यादा निर्मित होने के कारण अंडाशय (Ovary) में छोटी-छोटी गांठ (cyst) बन जाती हैं, जिसके कारण महिलाओं के मासिक धर्म (Menstrual Cycle) के साथ-साथ प्रजनन क्षमता (Fertility) पर असर पड़ता है। इसी के कारण महिलाओं में गर्भधारण को लेकर असमर्थता भी जन्म लेती है। और यदि इसका सही इलाज नहीं हुआ तो आगे चलकर ये बीमारी कैंसर का रूप भी ले सकती है।

पीसीओएस (PCOS) के लक्षण:

*मुंहासे
*पेटदर्द
*अनियमित मासिक धर्म
*चेहरे/शरीर पर अधिक बाल आना
*गर्भधारण में समस्या
*पिगमेंटेशन
*यौन इच्छा में कमी
*बार-बार गर्भपात (miscarriage) होना
*मोटापा
*सिर के बालों का गिरना
*डैंड्रफ

पीसीओएस (PCOS) के कारण:

पीसीओएस (PCOS) का मुख्य कारण तो हार्मोन का जरूरत से ज्यादा निर्मित होना है। लेकिन डॉक्टर्स के मुताबिक पिछले कुछ सालों से यह बीमारी 50 से 60 प्रतिशत तक ज्यादा देखी गई है और इस असामान्य वृद्धि के कुछ खास कारण निम्न हैं:

*असंतुलित आहार (जंक फ़ूड, वसायुक्त और मीठा आहार लेने से)
*बीमारियाँ (डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर)
*मोटापा (obesity)
*तनाव (stress)
*अनियमित दिनचर्या अगर हार्मोन को बैलेंस कर लिया जाए तो ये भी अपने आप ही ठीक हो जाएगा।

आइये जानते हैं PCOS/PCOD के बारे में कुछ और महत्वपूर्ण बातें

आइये जानते हैं कि किस तरह इस बीमारी से दूर रहा जा सकता है:

वजन कम करके (By losing weight)

अगर आपका वजन बहुत ज्यादा है, तो फ़ौरन ही इसे कम करने की दिशा में कदम बढाएं। वजन कई बीमारियों को जन्म देता है। ज्यादा वजन से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढती है, जो ओवरी में सिस्ट (cyst) को बनाने के जिम्मेदार होते हैं। कई PCOD मरीजों में तो सिर्फ वजन कम करने के बाद ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

एक्सरसाइज करके (By Exercise)

एक्सरसाइज से आपका वजन तो काबू में होगा ही साथ ही साथ PCOD की वजह से होने वाली इंसुलिन रेसिस्टेंट (Insulin Resistant) की समस्या भी कम हो जाएगी। इसके लिए जरूरी नहीं कि आप जिम जाकर ही एक्सरसाइज करें बल्कि आप अपनी सुविधानुसार पैदल चलना, दौड़ना, तैरना साइकिलिंग करना, रस्सी कूदना या डांस करना भी शामिल कर सकती हैं।

लाइफस्टाइल (By changing Lifestyle)

लाइफस्टाइल में बदलाव लाकर, चिंता और तनाव से दूर रहकर और योग व प्राणायाम करके भी इस रोग से बचा जा सकता है।

संतुलित आहार (balanced diet)

खाने में पौष्टिक चीज़ों का सेवन संतुलित मात्रा में करें। बाहर का खाना, जंक फ़ूड और तली हुई चीज़ों से जितना हो सके दूर ही रहें। आप इन चीज़ों को अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं:

*यदि आप मांसाहारी हैं तो सैलमन मछली (Salmon Fish) का सेवन करें। इस फिश में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है और ये महिलाओं में एण्ड्रोजन हार्मोन के संतुलन को भी बनाए रखता है।
*हरी पत्तेदार सब्जियों को सलाद में शामिल करें।
*दालचीनी शरीर में इंसुलिन लेवल को संतुलित रखती है और मोटापे को भी नहीं बढ़ने देती। अपनी डाइट में किसी भी तरह से दालचीनी को जरुर शामिल कर लें।
*ब्रोकली में विटामिंस के साथ-साथ कम कैलोरी भी होती है, तो इसके सेवन से आपको ये बीमारी छू भी नहीं पाएगी।
*मशरूम में भी कम कैलोरी होती है। अगर आपको ओवरी में सिस्ट है, तो इसके सेवन से आपको काफी फायदा मिलेगा।
*PCOD के इलाज में कैल्शियम कि भरपूर मात्रा की जरूरत होती है, इसलिए दूध और दही लेना ना भूलें।
*पालक में भी कम कैलोरी होने के कारण यह आपके लिए काफी मददगार साबित होगी।
*अलसी में ओमेगा-3 मौजूद होता है, जो कि हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में काफी सहायता करते हैं।

अगर जानना चाहते हैं अलसी को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के कुछ स्वादिष्ट तरीकों के बारे में, तो देखिये ये विडियो

*बादाम और अखरोट को सुबह नाश्ते में शामिल कर लें।
*अंकुरित अनाज का सेवन करें।

दवाइयां (medicines)

डॉक्टर के अनुसार हार्मोन दवाइयों की मदद से इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। यदि आप इसका इलाज करा रही हैं, तो डॉक्टर के द्वारा दी हुई दवाइयों को समय पर और निर्देशानुसार लेती रहें। दवाइयों के जरिये हार्मोन्स को बैलेंस किया जा सकता है।

सर्जरी (Surgery)

जरूरत पड़ने पर PCOD के लिए ऑपरेशन भी किया जाता है। जिसे Laproscopic Ovarian Drilling (LOD) या laparoscopic Electrocauterisation of Ovarian Stroma (LEOS) कहा जाता है।

आखिर में!!! आपकी सेहत आपके ही हाँथ में है। इसे बेहतर बनाने के लिए जो भी करना है आपको ही करना है। तो जरा अपनी सेहत के प्रति सजग रहें और अपने शरीर का रेगुलर चेकअप कराती रहें।