हमारी जीवनशैली में आ रहे निरन्तर परिवर्तन रोज़ हमारे सामने नई-नई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ला रहे हैं, और ऐसी ही एक समस्या थायरॉइड भी है जिसके मरीजों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है। आजकल यह गंभीर स्वास्थ्य समस्यायों में से एक है। थायरॉइड की समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि पहले तो आपको इसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी होना जरूरी है।

सबसे पहले आइये जानते हैं थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland) के बारे में (What is Thyroid Gland)

थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid gland), जो कि हमारे गले में मौजूद होती है, मानव शरीर मे पायी जाने वाली सबसे बड़ी एंडोक्राइन ग्‍लैंड (Endocrine gland) में से एक है। यह लगभग 2 इंच की और तितली के आकार की ( butterfly-shaped) की होती है। जब हम बोलते हैं तो गले पर हाथ लगाकर हम जिसे महसूस करते हैं वह स्वरयंत्र या लेरिंक्स (Lyrnx) होता है, और थायरॉइड ग्रंथि ठीक इसके नीचे होती है। इसे टेंटुआ (Adam’s apple) भी कहते हैं। पिट्यूटरी ग्रंथि (pituitary gland), जो कि मस्तिष्क में होती है, यही थायरॉइड ग्रंथि को कंट्रोल करती है।
इस ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन थाइरॉक्सिन (Thyroxine) की वजह से हमारे शरीर में कई तरह की गतिविधियाँ होती हैं। इस हार्मोन की कमी या अधिकता के हमारे शरीर पर अलग-अलग प्रभाव पड़ते हैं। यह ग्रंथि मेटाबोलिज्म का कंट्रोल करती है यानि हम भोजन में जो भी कुछ खाते हैं यह उसे ऊर्जा में बदलने का काम करती है। इसके साथ ही थायरॉइड ग्रंथि हमारे शरीर की निम्न जरूरी गतिविधियों पर काम करती है:
*सांस लेना (Breathing)
*दिल की धड़कन की गति (Heart rate)
*शरीर का वजन
*शरीरिक ताप (Body temperature)
*कोलेस्ट्रोल लेवल
*मांसपेशियों की मजबूती (Muscle strength)
* मध्य और परिधीय तंत्रिका प्रणाली (Central and peripheral nervous systems)
*मासिक धर्म (Menstrual cycles)
किसी-किसी का थायरॉइड लेवल हाई होता है तो किसी का लो, जिसकी वजह से कई तरह की शारीरिक समस्याएँ सामने आती हैं। थायरॉइड रोग दो तरह का होता है; हाइपरथायरॉइडिज्म और हाइपोथायरॉइडिस्म (Hyperthyroidism and Haipothyroidism)। इस रोग के होने के मुख्य कारणों में शामिल हैं:
*परिवार में पहले से ही किसी को थायरॉइड की समस्या हो तो ये भी आपके लिए थायरॉइड का मुख्य कारण हो सकता है।
*बहुत ज्यादा तनाव या टेंशन लेने से भी थायरॉइड ग्रंथि पर असर पड़ता है।
*बेवजह दवाओं का सेवन करना। ये दवाएं शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव छोड़कर थायरॉइड का मुख्य कारण बनतीं हैं।
*टॉन्सिल्स, सिर और थाइमस ग्रंथि (Thymus gland) की परेशानी में एक्स-रे कराना भी थायरॉइड का कारण बनती है।
*कुछ महिलाओं में गर्भावस्था में या गर्भावस्था के बाद थायरॉइड (खासतौर पर हाइपोथायरॉइडिस्म) रोग होने की सम्भावना बहुत अधिक बढ़ जाती है क्योंकि उनके शरीर में अपनी ही थायरॉइड ग्लैंड के लिए एंटीबॉडी बन जाती हैं।
*शरीर में आयोडीन की कमी (Iodine deficiency in the body)।
*हाशीमोटो डिसीज़ (Hashimoto Disease)।

आइये जानते हैं हाइपरथायरॉइडिज्म और हाइपोथायरॉइडिज्म के बारे में

वैसे तो ये दोनों ही थायरॉइड रोग के ही प्रकार हैं, लेकिन फिर भी दोनों की अवस्थाएँ एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं।

हाइपरथायरॉइडिज्म (What is Hyperthyroidism?)

थायरॉइड ग्रंथि में अधिक मात्रा में हार्मोन (थाइराक्सिन) बनने की स्थिति को हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) कहा जाता है। इसमें मेटाबोलिज्म (Metabolism) की गति तेज़ हो जाती है।
हाइपरथायरॉइडिज्म के मुख्य लक्षण (Symptoms – Hyperthyroidism): ऐसा भी हो सकता है कि इसमें आपको कोई भी लक्षण दिखाई ही ना दें या फिर आपको एक साथ अनेक लक्षण नजर आने लगें, जैसे कि:
*कमजोरी, थकान
*बेचैनी
*पसीना आना, बहुत ज्यादा गर्मी लगना
*हाँथ-पैर कांपना, हृदय गति बढ़ना
*वजन कम होना
*त्वचा में खुजली होना
*बालों का झड़ना
*साँस लेने में परेशानी

हाइपोथायरॉइडिज्म (What is Hypothyroidism?)

इसमें थायरॉइड ग्रंथि हार्मोन के स्तर में कमी कर देती है। इसमें व्यक्ति को किसी और तरह का कोई रोग नहीं होता बल्कि उसके मेटाबोलिज्म की गति कम हो जाती है।
हाइपोथायरॉइडिस्म के मुख्य लक्षण (Symptoms – Hypothyroidism):
*कब्ज होना
*चेहरा फूल जाना
*अचानक वजन बढ़ना
*चिडचिडापन
*डिप्रेशन
*भौहों के बाल गिरना
*शरीर ठंडा पड़ना
*ह्रदय गति कम पड़ना
*अनियमित माहवारी
*पसीना की कमी
*शुष्क त्वचा (dry skin)
*बदनदर्द
*गले में सूजन
*याददाश्त कम होना
*भंगुर नाखून

कैसे पता करें कि आपको थायरॉइड है (डायग्नोसिस टेस्ट) ? (How to Diagnose Thyroid Disease?)

कुछ टेस्ट के जरिये इसका पता लगाया जा सकता।
अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई भी ज्यादा दिनों तक अपने शरीर में दिखता है तो आपको थायरॉइड रोग (हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथाईरॉडिज्म) हो सकता है। इसलिए संदेह होने पर इस रोग का पता करने के लिए किसी विश्वसनीय पैथोलॉजी में अपनी थायरॉइड प्रोफाइल चेक करायें। यह टेस्ट सुबह खाली पेट होता है, और थायरॉइड रोग पता करने के लिए मुख्य टेस्ट है।
ब्रिटिश थायरॉइड फाउंडेशन (British Thyroid Foundation) के अनुसार नार्मल थायरॉइड हॉर्मोन लेवल वैल्यू हैं:
Test   
From   
To   
Units  
Serum Thyrotropin (TSH)
0.4
4*
mU/L (milliunits per liter)
Free Thyroxine (FT4)
9.0
25.0
pmol/L (picomoles per liter))
Free Triiodothyronine (FT3)
3.5
7.8
pmol/L (picomoles per liter))
यह वैल्यू अलग अलग लेबोरेटरी में थोड़ी अलग हो सकती हैं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं में और बच्चों में भी इन वैल्यूज में अंतर होता  है।
*कुछ एसोसिएशन और लेबोरटरी TSH लेवल 5 नार्मल और उसके ऊपर हाइपोथायरॉइडिज्म मानते हैं।
इन टेस्ट में यदि T3 या T4 की अधिकता या फिर TSH (Thyroid-Stimulating Hormone) की कमी पाई जाती है, तो इसका मतलब कि आपको हाइपरथाईरॉडिज्म है। और, अगर T3 या T4 की कमी या फिर TSH (Thyroid-Stimulating Hormone) का लेवल नार्मल से अधिक है तो आपको हाइपोथायरॉइडिज्म है।
आखिर में! ! ! यह बहुत जरूरी है कि आप अपने थायरॉइड की जाँच कराते रहें और इसके बढ़ने या घटने का पता चलते ही किसी गंभीर समस्या से बचने के लिए फ़ौरन डॉक्टर से सलाह कर उसका इलाज करा लें।