कलौंजी (Nigella sativa or Black Seeds) हमारे देश में लगभग हर रसोईघर में मिल जायेगी लेकिन इसकी याद सिर्फ तभी ज्यादा आती है जब घर की महिलायें साल भर का अचार बना रहीं हों। लेकिन, कलौंजी का यही सिर्फ एक उपयोग नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कलौंजी और कलौंजी का तेल एक बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि बनकर उभरे हैं, जिनका उपयोग कई शारीरिक समस्याओं पर बहुत ही प्रभावकारी सिद्ध हुआ है।

कलौंजी में प्राकृतिक रूप से विटामिन A, B1, B2, C, नियासिन, कैल्शियम, आयरन, सोडियम, पोटेशियम, मैंगनीज, जिंक, और सेलेनियम और बहुत अधिक लाभकारी ओमेगा 3 और 6 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। कलौंजी के बीजों में लगभग 40% कार्बोहायड्रेट, लगभग 20% प्रोटीन, और लगभग 40% तेल होता है। इसमें पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को हानि पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और कई रोगों से रक्षा करते हैं।

कलौंजी के बीजों को इस्तेमाल करने के लिए, लगभग 1/2 चम्मच बीज रात को पानी में गला दें और सुबह खाली पेट इन्हे इस्तेमाल करें। अच्छे परिणाम के लिए कम से कम 6 से 8 हफ्ते इस्तेमाल करें। बीजों की जगह अगर आप तेल इस्तेमाल करने का विचार बना रहे हैं तो शुरुआत 1/2 चम्मच तेल से करें, और धीरे धीरे जब आपका शरीर इसके प्रति ग्रहणशील ही जाए तो मात्रा 1 चम्मच तक बढ़ा सकते हैं।

सौंदर्य बढाए

कलौंजी के तेल की नियमित मालिश बालों का झड़ना कम करती है। इसके साथ ही त्वचा पर इसका सेवन मुहांसे और उनसे हुए दागों को हटाने में बहुत प्रभावकारी है। चेहरे की झुर्रियां हटाने के लिए थोड़े से कलौंजी के तेल में लगभग 1 चम्मच शहद मिलायें। अब इस मिश्रण में अपनी पसंद अनुसार ऑलिव ऑयल या जोजोबा ऑयल मिलायें। सभी सामग्री को आपस में अच्छी तरह मिलायें और इससे अपने चेहरे की नीचे से ऊपर और सर्कुलर मोशन में अच्छी तरह मालिश करें। अच्छे परिणामों के लिए नियमित रूप से हफ्ते में कम से कम दो बार इस्तेमाल करें।

आइये जानते हैं कलौंजी का उपयोग कर बनाये गए एक ऐसे हेयर पैक के बारे में जो गंभीर बालों के झड़ने की समस्या, डेंड्रफ, सफ़ेद बाल जैसी समस्याओं के लिए 100% इफेक्टिव और कारगर है


दर्दनिवारक

कलौंजी का तेल एक बहुत अच्छे दर्द निवारक की तरह कार्य करता है। इसमें पाया जाने वाला थायमोक्विनोन (Thymoquinon) एक नेचुरल दर्दनिवारक है जो दर्द से छुटकारा दिलाने में उपयोगी सिद्ध होता है। किसी भी तरह के हड्डियों/जोड़ों के दर्द या मांसपेशियों के दर्द की स्थिति में इस तेल से प्रभावित जगह पर मालिश करें। जल्द आराम होगा। सिरदर्द होने पर इस तेल से स्कैल्प की और सिर की चारों तरफ अच्छे से मालिश करें, जल्द आराम होगा। दांतदर्द की स्थिति में आधी चम्मच कलौंजी का तेल गुनगुने पानी में मिलायें और इसे मुँह में भरकर कुछ देर ऐसे ही रहें और फिर थूक दें। आप तेल को दर्द वाली जगह पर सीधे भी लगा सकते हैं। यह प्रयोग दिन में 3 से 4 बार दोहरायें। कानदर्द की स्थिति में 1/2 चम्मच कलौंजी का तेल इतनी ही मात्रा में सरसों के तेल के साथ मिलायें। इसे बिलकुल हल्का सा गर्म करें और फिर कुछ बूँदें कान में डालें। निश्चित ही आराम होगा।

कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल

यह शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम कर (LDL cholesterol) अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) का लेवल बढ़ाती है। इसके साथ ही यह टोटल कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम कर फैट को शरीर में जमने से रोकती है। इसके सेवन के लिए आप इसे इसके बीज या तेल किसी भी रूप में उपयोग कर सकते हैं। रोज़ रात को सोने से पहले या सुबह सुबह 1/2 चम्मच कलौंजी का तेल लगभग 1 कप गुनगुने दूध में मिलायें और सेवन करें। यह ओमेगा फैटी एसिड 3 और 6 का उत्तम स्त्रोत है जो हार्ट के लिए अच्छे माने जाते हैं।



ब्लड शुगर कंट्रोल

कलौंजी में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं जो इन्सुलिन सेंसिविटी को बढ़ाती है। अगर आप प्रि-डायबिटिक हैं या फिर आपको डायबिटीज है तो अपने ग्लूकोज लेवल को नियंत्रण में लाने के लिए कलौंजी के तेल का इस्तेमाल करें। इसका सेवन करने के लिए लगभग 1/2 कप ब्लैक टी बनायें और इसमें 1/2 चम्मच कलौंजी का तेल मिलायें। इसे सुबह-शाम लें और अपने शुगर लेवल पर नज़र रखें। कुछ दिनों के नियमित सेवन से इन्सुलिन का लेवल बढ़ेगा जिससे आपको अपने शुगर लेवल में सुधार दिखने लगेगा। इतना ही नहीं अगर आपको  PCOS (ओवरी में सिस्ट) है और इसकी वजह से आपको माहवारी के समय पेट में दर्द, या माहवारी का समय पर न आना ऐसी कोई समस्या है तो उसमे भी आपको फायदा मिलेगा।

सर्दी, जुकाम या अन्य कोई एलर्जी

कलौंजी के तेल का सेवन सर्दी, जुकाम, नाक बंद और इन सबके कारण होने वाले बुखार में भी फायदेमंद होता है। इसके लिए लगभग 1 कप पानी में थोड़ा सा अदरक डालकर उबालें। जब यह 1/2 कप रह जाए तो इसे एक कप में छान लें। अब इस पानी में लगभग 1 चम्मच शहद और 1/2 चम्मच कलौंजी का तेल मिलायें। चम्मच से अच्छी तरह मिलायें और गरम गरम चाय की तरह पी लें। दिन में 2 से 3 बार पियें। जब तक लक्षण पूरी तरह न जायें इसका सेवन चालू रखें।

नाइगेलॉन (Nigellone) कलौंजी में पाया जाने वाला एक्टिव तत्व है जो श्वसन सम्बन्धी रोगों और शरीर में होने वाली किसी भी तरह की एलर्जी से लड़ने में बहुत कारगर है। श्वास लेने में तकलीफ, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फ्लू इसमें मुख्य हैं। अस्थमा की स्थिति में लगभग 1/2 चम्मच कलौंजी का तेल एक गिलास गर्म पानी में मिलायें। आप चाहें तो इसमें स्वाद और गुण बढ़ाने के लिए 1 चम्मच शहद भी मिला सकते हैं। दिन में दो बार सेवन करें। नियमित इस्तेमाल से फायदा ज़रूर होगा।

B.P. कंट्रोल

कलौंजी के बीज नियमित रूप से लेने से उच्च रक्त दाब (High BP) की समस्या कम होती है।

पाचन में सुधार

कलौंजी के बीजों में डाइटरी फाइबर (dietary fiber) की मात्रा अधिक होने के कारण ये पाचन सम्बन्धी समस्याओं जैसे बदहज़मी, गैस, डायरिया, और पेट दर्द में भी लाभकारी हैं।

ध्यान दें ! ! !

अगर आप कलौंजी का तेल या उसके बीज इस्तेमाल कर रहे हैं तो उतनी ही मात्रा में सेवन करें जितनी सेवन करने की सलाह दी जाती है। अधिक सेवन से अधिक फायदा के धोखे में न रहें। इसके साथ ही अगर आपका शुगर या कोलेस्ट्रॉल का लेवल बहुत अधिक बड़ा हुआ है, या फिर आपको किसी तरह की फ़ूड एलर्जी है तो उपयोग करने से पहले अपने फिजीशियन से सलाह जरूर लें।